नेतन्याहू ने खोला खजाना—डिफेंस पर अरबों डॉलर, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तूफान

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है… यह उस जंग की तैयारी है जो अब थमने का नाम नहीं ले रही। Benjamin Netanyahu ने खजाने का ताला खोल दिया है—और हर डॉलर अब सीधे युद्ध की आग में झोंका जाएगा। सवाल ये नहीं कि इजरायल कितना खर्च करेगा… सवाल ये है कि ये जंग अब कितनी लंबी चलेगी?

Knesset में जो हुआ, वह सिर्फ एक वोटिंग नहीं थी—वह युद्ध की औपचारिक घोषणा जैसा था। बहुमत सांसदों ने बजट के पक्ष में हाथ उठाए और इजरायल का कुल बजट 271 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा—डिफेंस। सरकार साफ कर चुकी है: “अब हर संसाधन, हर नीति… सिर्फ युद्ध के लिए।”

डिफेंस बजट दोगुना: क्या संदेश है दुनिया के लिए?

2023 में जहां रक्षा बजट 27.5 अरब डॉलर था, अब उसे बढ़ाकर 45 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह सिर्फ बढ़ोतरी नहीं—एक संकेत है। Israel अब सिर्फ बचाव नहीं कर रहा… वह ‘लंबी लड़ाई’ के लिए खुद को तैयार कर रहा है। और यह तैयारी सिर्फ Iran के खिलाफ नहीं—बल्कि उन सभी ताकतों के खिलाफ है जो उसके खिलाफ खड़ी हैं।

चार मोर्चों पर जंग: इजरायल की असली चुनौती

यह युद्ध एक-लाइन का नहीं है। इजरायल इस वक्त एक साथ कई मोर्चों पर उलझा हुआ है:

  1. Hezbollah
  2. Hamas
  3. Houthis

इन तीनों के पीछे ईरान का समर्थन बताया जाता है। यानी यह सिर्फ एक देश बनाम एक देश की लड़ाई नहीं—यह एक ‘नेटवर्क वॉर’ है।

वित्त मंत्री का बयान: “ये युद्ध का बजट है”

Bezalel Smotrich ने साफ कहा— “यह बजट सिर्फ आर्थिक नहीं, सामरिक दस्तावेज है।”

उनके अनुसार, इस समय इजरायल का लक्ष्य है अपनी सैन्य ताकत को और आक्रामक बनाना। क्षेत्रीय पकड़ मजबूत करना। और दुश्मनों को स्पष्ट संदेश देना।

विपक्ष का हमला: ‘जनता लूट रही है सरकार’

लेकिन हर कोई इस फैसले से खुश नहीं है। Yair Lapid ने सीधे सरकार पर हमला बोला। उनका बयान तीखा था “यह सरकार युद्ध के नाम पर जनता को लूट रही है। लोग बंकर में हैं… और सत्ता पैसे गिन रही है।” यह बयान बताता है—जंग सिर्फ सीमा पर नहीं, संसद के अंदर भी जारी है।

एक महीना… और बढ़ती आग

इजरायल-ईरान संघर्ष को एक महीना हो चुका है। लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं। लगातार हमले, न्यूक्लियर ठिकानों पर स्ट्राइक, और बढ़ती सैन्य तैनाती—ये सब संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष जल्दी खत्म नहीं होगा।

क्या यह ‘लॉन्ग वॉर प्लान’ है?

डिफेंस बजट दोगुना करना एक इमरजेंसी फैसला नहीं होता—यह एक ‘लॉन्ग-टर्म वॉर स्ट्रेटेजी’ का हिस्सा होता है।

इसका मतलब इजरायल लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। आर्थिक संसाधनों को युद्ध में झोंका जाएगा और कूटनीति पीछे छूट सकती है

अब जंग सिर्फ मैदान में नहीं, अर्थव्यवस्था में भी

नेतन्याहू का यह फैसला साफ संकेत देता है—अब युद्ध सिर्फ मिसाइलों से नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि बजट, अर्थव्यवस्था और संसाधनों से भी लड़ा जाएगा। मिडिल ईस्ट अब सिर्फ बारूद का ढेर नहीं… बल्कि ‘वॉर इकॉनमी’ का सबसे बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

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